हिंदुस्तानी न्याय व्यवस्था का हाल देखिये, दोष मुक्ति होने पर भी 15 वर्ष से किसी ने उसको जेल से निकाला नहीं।
और अब भी जब यह पता चला, तो कोर्ट ने सिर्फ यह कहा की यह घोर अन्याय है।
यह नहीं कहा की किसके टेबल पर फाइल जमी रही, उसको 15 से भी दोगुना टाइम, यानी 30 वर्ष की सज़ा होगी। न!!
उसका तो नाम तक नहीं सावर्जनिक किया।
यह दैनिक भास्कर के 14 मई, 2026 पर छठे पेज पर लगी खबर की तस्वीर है:
#jailed for 15 years
judicial justice
